रांची: मांडर के ऐतिहासिक मुड़मा पाड़हा जतरा स्थल की करीब 65 एकड़ जमीन का मामला कई वर्षों से लंबित है। जमीन का सीमांकन, अधिग्रहण और बंदोबस्ती नहीं होने से विवाद की स्थिति बनी हुई है। राजी पाड़हा सरना प्रार्थना सभा ने राज्य सरकार से जल्द कार्रवाई करने की मांग की है।

बुधवार को रांची प्रेस क्लब में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में संगठन के केंद्रीय प्रवक्ता संजय पाहन ने कहा कि मुड़मा जतरा स्थल उरांव और मुंडा समुदाय की ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत है। इस जमीन के सीमांकन और बंदोबस्ती के लिए कई बार आवेदन दिए गए हैं। अंचल अधिकारी ने 2014, 2015 और 2018 में जांच रिपोर्ट भी सौंपी थी, लेकिन अब तक मामला नहीं सुलझा है।

संजय पाहन ने आरोप लगाया कि ग्रामसभा ने जतरा की जमीन पर स्थायी निर्माण रोकने का फैसला लिया था। इसके बावजूद वहां निर्माण कार्य शुरू किया गया। इससे समुदाय के लोगों में नाराजगी है। उन्होंने बताया कि जतरा स्थल को सुरक्षित रखने के लिए जमीन के बदले दूसरी जमीन देने का प्रस्ताव भी रखा गया था, लेकिन इस पर कोई फैसला नहीं हुआ।

उन्होंने कहा कि बिरसा उरांव की ओर से हाईकोर्ट में दायर कंटेम्प्ट मामले को अदालत ने ड्रॉप कर दिया था। संगठन ने सरकार से मांग की कि वर्ष 2018 से उपायुक्त और अपर समाहर्ता के स्तर पर लंबित मामले का जल्द निपटारा किया जाए और जमीन की बंदोबस्ती पूरी कर जतरा स्थल को सुरक्षित किया जाए।

संवाददाता सम्मेलन में आदिवासी छात्र संघ के केंद्रीय अध्यक्ष सुशील उरांव, गंगू पाहन, दिनेश मुंडा, बबलू मुंडा, रंजीत उरांव और क्रांतिक उरांव सहित अन्य लोग मौजूद थे।

