मांडर (रांची): मुड़मा मेला स्थल की जमीन को लेकर चल रहे विवाद में अब स्वामित्व के दस्तावेज सामने आने लगे हैं। जमीन के एक हिस्से को लेकर तीन डिड धारियों ने अपना अधिकार बताते हुए कागजात प्रशासन के सामने रखने का दावा किया है। उनका कहना है कि जिस जमीन को अब्दुल अंसारी की ओर से दान किए जाने की बात कही जा रही है, उस पर उनके नाम से डीड मौजूद है।
शेख रेयाजुल अंसारी, जैनुल अंसारी और सलमा खातून ने खाता संख्या 146 के प्लॉट संख्या 297 की 1.13 एकड़ जमीन से संबंधित दस्तावेज पेश किए हैं। तीनों का दावा है कि जमीन पर उनका वैध अधिकार है और इसी आधार पर उन्होंने दान किए जाने के दावे पर सवाल उठाया है।
डिड धारियों ने आरोप लगाया है कि अब्दुल अंसारी के पास जमीन के स्वामित्व से जुड़े वैध कागजात नहीं हैं। इसके बावजूद जमीन दान करने का दावा किया जा रहा है। उनका कहना है कि राजस्व रिकॉर्ड, रजिस्टर्ड डीड और अन्य संबंधित दस्तावेजों की जांच से वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है।
मामले में अब प्रशासनिक जांच की मांग उठी है। तीनों डिड धारियों ने अधिकारियों से जमीन के सभी दस्तावेजों का सत्यापन कराने और रिकॉर्ड के आधार पर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। उनका कहना है कि सार्वजनिक महत्व वाले मेला स्थल से जुड़ा मामला होने के कारण किसी भी दावे पर अंतिम निर्णय दस्तावेजों की जांच के बाद ही होना चाहिए।
तीन डिड धारियों के सामने आने से मुड़मा मेला स्थल की जमीन का विवाद नए चरण में पहुंच गया है। अब सवाल केवल जमीन दान किए जाने के दावे तक सीमित नहीं रहा, बल्कि संबंधित भूखंड के वास्तविक स्वामित्व और दस्तावेजों की वैधता की जांच भी महत्वपूर्ण हो गई है।
फिलहाल प्रशासन की ओर से इस विवाद में किसी पक्ष के दावे को सही ठहराने वाला आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। दस्तावेजों की जांच और प्रशासनिक कार्रवाई के बाद ही जमीन के अधिकार को लेकर स्थिति साफ हो सकेगी।
