रजरप्पा (रामगढ़): प्रगतिशील लेखक संघ झारखंड का दो दिवसीय पांचवें राज्य सम्मेलन का आयोजन रजरप्पा स्थित सीसीएल के ऑफिसर्स क्लब सीसीएल में हुआ। स्वतंत्रता, समता और सृजन की प्रतिबद्धता के नब्बे साल के उत्सव की शुरुआत प्रलेस ने अपना झंडोत्तोलन कर किया। राज्य सम्मेलन के मौके पर प्रलेस के राष्ट्रीय महासचिव डॉ सुखदेव सिंह सिरसा शामिल हुए। उद्घाटन सत्र की शुरुआत इप्टा के साथियों द्वारा शैलेंद्र के गीत, “तू जिंदा है तो ज़िन्दगी की जीत पर यकीन कर” गाकर किया। खोरठा के वरिष्ठ साहित्यकार डॉ बीएन ओहदार ने स्वागत भाषण दिया।
कार्यक्रम में आगे इप्टा की राज्य महासचिव अर्पिता ने एकजुट होने की बात कही। उन्होंने कहा कि ऐसी प्रगतिशीलता हो जिसमें महिलाओं और हाशिए के लोगों की आवाजें बराबर शामिल हो। वहीं वक्ताओं ने लोकतांत्रिक और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करने और सामाजिक न्याय, जनपक्षधारी और प्रगतिवादी लेखन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
सुखदेव सिंह सिरसा ने कहा कि यह नब्बे वर्ष सिर्फ़ उत्सव नहीं बल्कि सफलता,असफलता और चुनौतियों का आँकलन का भी है’। कथाकार रणेन्द्र ने हिंदी के अतिरिक्त अन्य भाषाओं में प्रगतिवादी धारा के प्रभावों को रेखांकित करते हुए कहा कि यह प्रभाव शास्त्रीय संगीत में भी देखा जा सकता है।
कार्यक्रम को प्रो. रामानन्दन सिंह, शैलेन्द्र, प्रो अहमद बद्र,पंकज मित्र, रणेंद्र, अनीस, अंकुर, गुंजल मुंडा ने भी संबोधित किया। दो दिवसीय सम्मेलन में साहित्य, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर साहित्यकार, संस्कृतिकर्मी, शोधार्थी और विद्यार्थी विभिन्न सत्रों में विचार-विमर्श कर रहे हैं। उद्घाटन सत्र का संचालन राज्य महासचिव मिथिलेश ने किया। आयोजन समिति के सचिव पॉवेल कुमार ने धन्यवाद ज्ञापन किया।
वहीं कार्यक्रम का दूसरा सत्र पुरखे रचनाकारों पर आधारित रहा। जिसमें साहित्यकार सुकांत भट्टाचार्य, विजयदान देथा, महाश्वेता देवी, अमरकांत और डॉ नामवर सिंह पर कमल,पार्थ बनर्जी और डॉ प्रज्ञा गुप्ता, ने वक्तव्य दिया। सत्र की अध्यक्षता नियाज़ अख्तर, निशि प्रभा और रणेंद्र ने की। जबकि संजय सोलोमन ने सत्र का संचालन किया। शाम को रायपुर से आए इप्टा के वरिष्ठ रंगकर्मी नाचा थियेटर विशेषज्ञ निसार अली और उनके साथियों ने बेहतरीन नाटक प्रस्तुत किया।
