भुरकुंडा (रामगढ़): सीसीएल बरका-सयाल प्रक्षेत्र अंतर्गत भुरकुंडा परियोजना के नये आउटसोर्सिंग पैच पर ओबी खनन कार्य और ट्रांसपोर्टिंग फिलवक्त पूरी तरह से ठप है। आउटसोर्सिंग कंपनी में रोजगार सहित अन्य मांगों को लेकर रैयत विस्थापित मोर्चा और संयुक्त विस्थापित प्रभावित मोर्चा द्वारा अलग-अलग धरना दिया जा रहा है। ओबी ट्रांसपोर्टिंग सड़क पर रिवर साइड में रैयत विस्थापित मोर्चा के बैनर तले महिला-पुरूष छह दिनों से धरना दे रहे हैं, वहीं आउटसोर्सिंग माइंस पर संयुक्त विस्थापित प्रभावित मोर्चा का धरना दूसरे दिन भी जारी रहा।
रैयत विस्थापित मोर्चा के विरेंद्र मांझी ने बताया कि जब तक मांगों पर साकारात्मक पहल नहीं किया जाएगा तक तक आंदोलन जारी रहेगा। कहा कि कोलियरी प्रबंधन रैयत-विस्थापितों के हितों की अनदेखी करती रही है। मोर्चा की मांगों को जल्द पूरा नहीं किया गया तो प्रक्षेत्र का भी चक्का जाम किया जाएगा।
वहीं संयुक्त विस्थापित प्रभावित मोर्चा की ओर से भी कहा गया कि सीसीएल प्रबंधन हमेशा से चारों राजस्व गांव के विस्थापितों-प्रभावितों को छलते आ रही है। हमारी छह सूत्री मांगों पर साकारात्मक पहल के आश्वासन के बावजूद प्रबंधन कोई ठोस कदम नहीं उठा रही है। मांगों पर अविलंब विचार कर सार्थक पहल नहीं करने पर आगे चरणबद्ध आंदोलन किया जाएगा।
बहराल, आंदोलन थमने के आसार कहीं से भी दिख नहीं रहे हैं, जबकि अन्य गुटों द्वारा भी आंदोलन शुरू किए जाने की संभावना बनती दिख रही है। हाल में चालू किए गए आउटसोर्सिंग माइंस को लेकर शुरू से ही विवाद की स्थिति बनी हुई है। रैयत विस्थापित-प्रभावित ग्रामीणों के अलावा कोयलांचल में रहनेवाले लोगों के भी कई गुट आउटसोर्सिंग कंपनी में रोजगार और भुरकुंडा लोकल सेल चालू कर हिस्सेदारी सुनिश्चित करने की मांग कर रहे हैं।
