रामगढ़: पीवीयूएनएल सुपर थर्मल पावर परियोजना की यूनिट-2 (800 एमडब्ल्यू) के सफल ट्रायल ऑपरेशन के साथ प्लांट  की कुल स्थापित क्षमता 1600 मेगावाट हो गई है। इसी के साथ ही पीवीयूएनएल ने एनटीपीसी समूह की कुल स्थापित क्षमता 90 गीगावाट का आंकड़ा पार कर लिया है। इस उपलब्धि पर पीवीयूएनएल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ए.के. सहगल ने कहा कि यूनिट-2 के चालू होने से पीवीयूएनएल झारखंड के ऊर्जा परिदृश्य की सबसे बड़ी परिवर्तनकारी परियोजना बन गया है. इस प्लांट से बनने वाली 85 प्रतिशत बिजली झारखंड को मिलेगी. इससे राज्य की इंडस्ट्री और आने वाले प्रोजेक्ट्स को बड़ी ताकत मिलेगी.

यूनिट-3 अगले साल किया जाएगा चालू

प्रबंधन की ओर से बताया गया कि यूनिट-1 का सीओडी 05 नवंबर 2025 को हो चुका है. यूनिट-2 ने मार्च 2026 में फुल लोड हासिल किया था. वित्त वर्ष 2025-26 में पीवीयूएनएल ने 2,062.90 एमयू बिजली बनाई. यूनिट-3 का काम तेजी से चल रहा है और इसे वित्त वर्ष 2026-27 में चालू करने का टारगेट है

यूएससी तकनीक का हो रहा उपयोग 

यह प्लांट अल्ट्रा सुपर क्रिटिकल यानी यूएससी तकनीक, एयर कूल्ड कंडेंसर यानी एसीसी और 100% ड्राई ऐश सिस्टम पर बना है. यह पर्यावरण के लिहाज से तापीय बिजली का भविष्य है। इसे लेकर एके सहगल ने कहा कि पीवीयूएनएल और एनटीपीसी देश को 24×7 भरोसेमंद बिजली देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने एनटीपीसी, जेबीवीएनएल, झारखंड सरकार, सीईए, एमओपी, बीएचईएल और सभी श्रमिकों का आभार जताया।

पीवीयूएनएल: एक नज़र 
कुल क्षमता : 1600 मेगावाट
यूनिट-2: 800 मेगावाट, 11 मई 2026 को ट्रायल पूरा
झारखंड का हिस्सा : 85% बिजली
तकनीक: यूएससी + एसीसी + 100% ड्राई ऐश

 

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