रांची: खनिजों पर सेस लगाने के राज्यों के अधिकार को लेकर झारखंड सरकार केंद्र के फैसले के विरोध में विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की तैयारी में है। पांच-छह अक्टूबर को प्रस्तावित सत्र में सरकार इस मुद्दे पर राज्य का पक्ष मजबूती से रखने की तैयारी कर रही है।
25 सितंबर की कैबिनेट बैठक में विशेष सत्र बुलाने का प्रस्ताव लाया जा सकता है। राज्य सरकार का दावा है कि खनिज सेस से जुड़े अधिकार प्रभावित होने पर सालाना करीब 14-15 हजार करोड़ रुपये के राजस्व पर असर पड़ेगा। 2026-27 के बजट में खनिजयुक्त भूमि से सेस के रूप में 14,656 करोड़ रुपये की प्राप्ति का अनुमान रखा गया है।
राज्य सरकार पहले भी सुप्रीम कोर्ट के 2024 के फैसले का हवाला देते हुए खनिजयुक्त भूमि पर कर लगाने के अपने अधिकार का पक्ष रख चुकी है। सरकार का तर्क है कि खनन से होने वाले विस्थापन और प्रदूषण का असर राज्य को झेलना पड़ता है, इसलिए उससे जुड़े राजस्व पर राज्य का अधिकार होना चाहिए।
प्रस्तावित विशेष सत्र के जरिए विधानसभा के माध्यम से केंद्र के सामने झारखंड का पक्ष रखने की तैयारी है। राज्य सरकार की मांग है कि राज्यों को सेस लगाने का अधिकार दिया जाए या अधिकार प्रभावित होने से होने वाले संभावित राजस्व नुकसान की भरपाई केंद्र करे।
