16वीं शताब्दी से पूर्व टोरी राजा ने मंदिर का कराया था निर्माण

रिपोर्ट: एसके सिन्हा

बालूमाथ: लातेहार के बालूमाथ सीमा स्थित में मां उग्रतारा नगर भगवती मंदिर का इतिहास 400 साल पुराना है। यह मंदिर चंदवा में है। यहां रानी अहिल्याबाई होल्कर भी पूजा कर चुकी हैं,इस मंदिर की खासियत यह है कि यहां 16 दिन दुर्गा पूजा होती है।दरअसल, टोरी राजा द्वारा 16वीं शताब्दी से पूर्व ही इस मंदिर का निर्माण कराया गया था,तब से लेकर अब तक यहां की परंपरा है कि जिउतिया त्योहार के दूसरे दिन से यहां माता का कलश स्थापना कर मां अष्टादशभुजी की पूजा आरंभ कर दी जाती है। 16 दिनों तक चलने वाले इस पूजा विधान में 3 दिन विशेष बलि दी जाती है. 16 दिन की पूजा के दौरान प्रतिदिन यहां विशेष पूजा अर्चना की जाती है. इस संबंध में मंदिर के सेवायत सह मुन्तजिमकार गोविंद बल्लभ मिश्रा ने बताया कि यहां 16 दिनों की पूजा का 500 वर्ष पुराना इतिहास है। माता के मंदिर की स्थापना काल से ही यहां 16 दिनों तक पूजा की जाती है।

फूल गिरने से मन्नत होती है पूरी

मंदिर के पुराने श्रद्धालुओं के मुताबिक माता की कृपा से यहां फूल गिरने की अनोखी परम्परा है। मंदिर के गर्भगृह के चबूतरे पर भक्त अपनी मनौती को लेकर फूल चढ़ाते हैं, अगर फूल तुरंत नीचे गिर जाए तो यह तय होता है कि आपने मन में जिस कार्य के पूर्ण होने की कामना को लेकर फूल चढ़ाया है, वह जल्द पूरी होने वाली है।

मिश्री और गड़ी है मुख्य प्रसाद

मां उग्रतारा नगर भगवती मंदिर में मुख्य रूप से प्रसाद के रूप में मिश्री और सूखा नारियल ही चढ़ाया जाता है। इसके अलावा यहां बकरे की बलि देने की भी प्रथा है।

जानें! कहां अवस्थित है मंदिर

बालूमाथ और औद्योगिक नगरी चंदवा के बीच एनएच-99 रांची मार्ग पर नगर नामक स्थान में एक अति प्राचीन मंदिर है जो भगवती उग्रतारा को समर्पित है। मान्यता है कि यह मंदिर लगभग एक हजार वर्ष पुराना है। इस मंदिर के निर्माण में टोरी स्टेट के शासक पीतांबर नाथ शाही और पुन:निर्माण में रानी अहिल्याबाई का नाम जुड़ा हुआ है। मंदिर निर्माण से जुड़ी मान्यताएं पलामू के गजट 1961 में दर्शाया गया है।

सभी धर्मों के लोगों का विश्वास है

प्रखंड मुख्यालय से करीब 8 किलोमीटर दूर प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण एवं पहाड़ियों के बीच बसे नगर गांव में रहने वाले हिंदुओं, मुसलमानों सहित सभी जाति-धर्म के लोगों की आस्था इस मंदिर से जुड़ी हुई है। यहां शादियों से चली आ रही परंपरा को सभी निभाते हैं।

आज भी जीवंत है परंपरा

मां उग्रतारा नगर मंदिर में राज दरबार की व्यवस्था आज भी कायम है। यहां पुजारी के रूप में मिश्रा और पाठक परिवार है। इसके अलावा मंदिर में बकरे की बलि देने के लिए पुरुषोत्तम पाहन, नगाड़ा बजाने के लिए, काड़ा की बलि देने के लिए लोग नियुक्त होते हैं।

By Admin

error: Content is protected !!