गिरिडीह/जमुआ: भारत देश के ख्याति प्राप्त कथावाचक और शास्त्रों के जानकार आचार्य कन्हैया द्विवेदी महाराज ने बताया कि सूर्य 14 जनवरी को रात्रि 9 :38 बजे धनु से मकर राशि में प्रवेश करेंगे और मकर संक्रांति का पर्व 15 को मनाया जायेगा। यही नहीं अब 2080 तक मकर संक्रांति 15 जनवरी को ही मनाई जाएगी। इसके बाद पुनः ज्योतिष गणना के अनुसार मकर संक्रांति एक दिन और बढ़ जाएगी। यानी सूर्य का राशि परिवर्तन हर वर्ष 16 जनवरी को होगा। इस बार सूर्य की राशि का परिवर्तन रात्रि 9.38 बजे है। आचार्य बताते हैं कि शास्त्रों के अनुसार उत्तरायण की अवधि को देवताओं का दिन और दक्षिणायन को देवताओं की रात कहा जाता है। मकर संक्रांति के दिन साधारण नदी भी गंगा के समान हो जाती है, जहां स्नान करने से पुण्योदय होता है।

72 साल में बदलती है तिथि 

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, हर साल सूर्य के राशि परिवर्तन में 20 मिनट का विलंब होता है। इस प्रकार तीन वर्षों में यह अंतर एक घंटे का हो जाता है। 72 वर्षों में 24 घंटे का फर्क आ जाता है। सूर्य और चंद्रमा ग्रह मार्गीय होते हैं। यह पीछे नहीं चलते हैं। इसलिए एक दिन बढ़ जाता है। इस लिहाज से 2008 में ही 72 वर्ष पूरे हो गए थे। हालांकि छह वर्षों तक सूर्य का राशि परिवर्तन प्रातःकाल में होने से पूर्व काल मानकर 15 जनवरी को मनाई जाती थी। मगर इसके पहले सूर्य का राशि परिवर्तन संध्याकाल में होता था। 1936 से मकर संक्रांति 14 जनवरी को मनाई जा रही थी। हालांकि 1864 से 1936 तक 13 जनवरी और 1792 से 1864 तक 12 जनवरी को मनाई जा रही थी। उन्होंने बताया कि इस बार 15 जनवरी को मकर संक्रांति का पर्व मनाया जायेगा।

 

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