मांडू (रामगढ़): केंद्र सरकार के “खेती बचाओ अभियान” के तहत कृषि विज्ञान केंद्र मांडू में मंगलवार को वैज्ञानिक संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद पूर्वी अनुसंधान परिसर पटना और कृषि प्रणाली पहाड़ी एवं पठारी अनुसंधान केंद्र रांची के संयुक्त कार्यक्रम का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। जिसमें झारखंड के पांच जिलों के कृषि आदान विक्रेता, प्रगतिशील किसानों और कृषि विशेषज्ञों सहित कुल 142 प्रतिभागियों ने इसमें सक्रिय भागीदारी की। संवाद कार्यक्रम का उद्देश्य संतुलित उर्वरक उपयोग, समेकित पोषक तत्व प्रबंधन (आईएनएम), मृदा स्वास्थ्य संरक्षण और टिकाऊ कृषि पद्धतियों के प्रति जागरूकता बढ़ाना इस कार्यक्रम का मुख्य लक्ष्य रहा।

मुख्य अतिथि ने दिया 4R सिद्धांत का मंत्र

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. उज्ज्वल कुमार, अध्यक्ष, सामाजिक आर्थिक एवं प्रसार प्रभाग, आईसीएआर-आरसीईआर पटना ने कहा कि खाद्य सुरक्षा और खेती की दीर्घकालिक उत्पादकता के लिए मृदा संरक्षण सबसे जरूरी है। उन्होंने उर्वरकों के 4R सिद्धांत उचित स्रोत, उचित मात्रा, उचित समय और उचित विधि पर जोर दिया। जिसमें क्रमश: सही प्रकार का उर्वरक चुनने, जरूरत के अनुसार ही खेत में डालने, फसल की अवस्था देखकर प्रयोग करने और उचित विधि के तहत सही तरीके से प्रयोग करने की बात कही गई। उन्होंने बताया कि रासायनिक उर्वरकों के साथ गोबर की खाद, हरी खाद और जैव उर्वरकों का इस्तेमाल मिट्टी की सेहत सुधारता है।

विश्वास और पारदर्शिता जरूरी

विशिष्ट अतिथि डॉ. अवनि कुमार सिंह, प्रधान वैज्ञानिक सह अध्यक्ष, कृषि प्रणाली का पहाड़ी एवं पठारी अनुसंधान केंद्र रांची ने कहा कि किसान और विक्रेता के बीच विश्वास कृषि विकास की नींव है। विक्रेताओं की जिम्मेदारी है कि वे गुणवत्तापूर्ण आदान उपलब्ध कराएं और किसान वैज्ञानिक सलाह के अनुसार ही इनका इस्तेमाल करें।

फसल विविधीकरण से बढ़ेगी आय

डॉ. वीरेन्द्र कुमार यादव, प्रधान वैज्ञानिक ने किसानों को सब्जी सोयाबीन, ऑफ-सीजन सेम, पेंसिल बीन, फ्रेंच बीन और लोबिया जैसी दलहनी सब्जियां उगाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि दलहनी फसलें हवा से नाइट्रोजन लेकर मिट्टी में जोड़ती हैं। इससे रासायनिक उर्वरक की जरूरत कम होती है और मिट्टी की उर्वरता के साथ किसान की आय भी बढ़ती है।

तकनीकी सत्र और खेत भ्रमण

कार्यक्रम के दौरान तकनीकी सत्र में डॉ. सुधांशु शेखर, वरिष्ठ वैज्ञानिक सह अध्यक्ष, कृषि विज्ञान केंद्र मांडू ने स्वागत भाषण में केंद्र की उपलब्धियां बताईं। वहीं डॉ. धीरज कुमार सिंह, डॉ. रेशमा शिंदे और डॉ. कीर्ति सौरभ ने मृदा परीक्षण आधारित उर्वरक प्रबंधन और जैविक-अजैविक स्रोतों के संतुलित उपयोग पर व्याख्यान दिए। प्रतिभागियों को केंद्र के धैंचा प्रदर्शन प्लॉट का भ्रमण कराया गया। वैज्ञानिकों ने धैंचा की जड़ों में बनी गांठों को दिखाकर बताया कि कैसे हरी खाद से मिट्टी में नाइट्रोजन और कार्बनिक पदार्थ बढ़ते हैं। इस दौरान किसानों ने कस्टम हायरिंग सेंटर का दौरा कर कृषि यंत्रों की जानकारी भी ली।

संकल्प के साथ हुआ समापन

कार्यक्रम का संचालन डॉ. इन्द्रजीत और डॉ. धर्मजीत खेरवार, विषय वस्तु विशेषज्ञों ने किया। अंत में सभी प्रतिभागियों ने ‘खेत बचाओ अभियान’ को घर-घर पहुंचाने और वैज्ञानिक खेती अपनाकर मृदा स्वास्थ्य बचाने का संकल्प लिया।

 

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