रामगढ़: सीसीएल बरका-सयाल प्रक्षेत्र की भुरकुंडा परियोजना बुधवार को रणक्षेत्र बन गई। परियोजना कार्यालय में बुलाई गई समाधान समिति की बैठक कार्यालय के बाहर निकलकर घमासान में बदल गई। विस्थापितों के दो पक्षों में जमकर मारपीट हुई है। जिसमें आधा दर्जन से ज्यादा लोगों को बाहरी और अंदरूनी चोटें आई हैं। मामला भुरकुंडा ओपी पहुंच गया है।

भुरकुंडा ओपी के बाहर जुटे लोग

मिली जानकारी के अनुसार नये आउटसोर्सिंग पैच पर काम कर रही आउटसोर्सिंग कंपनी में नौकरी को लेकर बीते दिनों समाधान समिति का गठन किया गया था। जिसमें रैयत विस्थापित मोर्चा और संयुक्त विस्थापित मोर्चा के पांच-पांच प्रतिनिधि, भुरकुंडा प्रबंधन के दो और आउटसोर्सिंग कंपनी के एक प्रतिनिधि शामिल हैं। रोजगार आवंटन हेतु बुधवार को भुरकुंडा परियोजना कार्यालय में समिति की बैठक बुलाई गई। जिसमें विवाद काफी बढ़ गया और मामला हाथापाई तक पहुंच गया। स्थिति बिगड़ने के बाद बैठक रद्द कर दी गई। वहीं कार्यालय से बाहर निकलते ही विस्थापितों के दोनों पक्ष के कुछ लोगों में बहसबाजी के साथ मारपीट शुरू हो गई।

मारपीट में रैयत विस्थापित मोर्चा के सन्नी कुमार बेसरा, तुरका मांझी और सुनील मुर्मू जख्मी हुए हैं। वहीं, संयुक्त विस्थापित मोर्चा के शंभू लाल मांझी, मन्ना राम मांझी, महावीर मांझी, शंकर मुर्मू, महादेव मांझी और सहदेव मांझी को भी चोटें आई हैं। इसके अलावा भी कई अन्य को अंदरूनी चोटें आई हैं। घटना के बाद दोनों पक्षों के घायल लोगों का इलाज कराया गया। वहीं मामले की सूचना पर भुरकुंडा पुलिस एक पक्ष के लोगों को थाने ले आई। दोनों पक्ष के लोगों ने भुरकुंडा ओपी में शिकायत कर कानूनी कार्रवाई की मांग की है। फिलहाल मामले की जांच चल रही है।

भुरकुंडा लोकल सेल को लेकर भी बनी थी खूनी संघर्ष की स्थिति 

भुरकुंडा परियोजना में बुधवार को हुए संघर्ष ने प्रबंधन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इससे पूर्व तकरीबन दो वर्ष पहले भी भुरकुंडा में लोकल सेल चालू करने के नाम पर दो पक्षों में खूनी संघर्ष की स्थिति बनी थी। हरवे हथियार के साथ लोग सड़क पर उतर आए थे। तब भुरकुंडा पंचायत के मुखिया अजय पासवान और पंचायत के सभी वार्ड सदस्यों ने तात्कालिक महाप्रबंधक अजय सिंह को खूनी संघर्ष की संभावना के मद्देनजर आवेदन सौंप हस्तक्षेप और पहल की मांग की थी। जिसके बाद मामला थमा और दोनों पक्षों में समन्वय बनाने की कवायद शुरू हुई। मामला अब भी अधर में लटका हुआ है, लेकिन किसी प्रकार के जान-माल की क्षति नहीं हुई ‌ 

 

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