रांची: झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितता और छात्र आंदोलन के दौरान हुए लाठीचार्ज को लेकर सियासत तेज हो गई है। मुख्यमंत्री चंपई सोरेन ने राज्य सरकार पर युवाओं के साथ छल करने का आरोप लगाते हुए पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग की है।
अपने आवास पर पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि झारखंड गठन के बाद से रोजगार और पारदर्शी नियुक्ति सबसे बड़ा मुद्दा रहा है, लेकिन सरकार ऐसी व्यवस्था नहीं बना सकी जिससे भर्ती परीक्षाओं पर सवाल खत्म हों। हालिया आंदोलन में हजारों छात्रों ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग सरकार तक पहुंचाने की कोशिश की।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि छात्रों की मांग को राजनीतिक चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए। युवा और उनके परिवार नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता चाहते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कार्रवाई के नाम पर सिर्फ इस्तीफे कराकर जांच से जुड़े दस्तावेजों पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। अगर किसी परीक्षा को रद्द करना है तो उसके लिए तय प्रशासनिक प्रक्रिया का पालन होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सरकार की घोषणा के बाद छात्रों ने आंदोलन स्थगित किया था, लेकिन बाद की घटनाओं से उनमें फिर असंतोष बढ़ा। छात्रों को भरोसा दिलाया गया कि कार्रवाई हो रही है, जबकि जांच को लेकर अब भी कई सवाल हैं।
प्रदर्शन के दौरान हुए लाठीचार्ज को उन्होंने दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में छात्रों को अपनी मांग रखने का हक है। आंदोलनकारी किसी दल के झंडे तले नहीं, बल्कि रोजगार की मांग को लेकर जुटे थे और उन्होंने उकसावे के बावजूद संयम बनाए रखा।
सरकार पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि सरकार अपनी कमियों को छिपाने के लिए आंदोलन को कमजोर करने और उसे राजनीतिक रंग देने की कोशिश कर रही है। प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर राज्य में भी युवाओं को रोजगार के लिए संघर्ष करना पड़े, यह गंभीर चिंता का विषय है।
अपने कार्यकाल का जिक्र करते हुए उन्होंने दावा किया कि उनके समय में भी नियुक्ति में पारदर्शिता के लिए एसआईटी का गठन किया गया था, लेकिन रिपोर्ट आने से पहले ही कार्यकाल समाप्त हो गया। अंत में उन्होंने सरकार से अपील की कि युवाओं को केवल आश्वासन नहीं, बल्कि निष्पक्ष जांच, स्पष्ट प्रक्रिया और भरोसेमंद नियुक्ति व्यवस्था दी जाए।
