आक्रोशित लोगों फैक्ट्री गेट और रामगढ़-पतरातू सड़क किया जाम

• एक अन्य गंभीर, रांची में चल रहा इलाज 

• मैंटेनेस में लापरवाही से हुआ हादसा 

• दिन भर रही गहमागहमी, जमी रही पुलिस 

• मुआवजे को लेकर कई बार हुई वार्ता रही विफल

रामगढ़: बरकाकाना ओपी क्षेत्र के हेहल स्थित मां छिन्नमस्तिका सिंमेट एंड इस्पात में शुक्रवार की रात टरबाइन ब्लास्ट करने से तीन इंजीनियरों की मौत हो गई। मृतकों की पहचान बोकारो निवासी विनित महतो, धनबाद निवासी संजीव केशरी और गढ़वा निवासी अभिषेक पांडेय के रूप में हुई। वहीं हादसे में एक कर्मी हजारीबाग तरूण कुमार गंभीर रूप से घायल हो गया। जिसे इलाज के लिए रांची के देवकमल अस्पताल ले जाया गया है। घटना की जानकारी पर शनिवार की सुबह स्थानीय लोग फैक्ट्री गेट के समक्ष धरने पर बैठ गए। जिसमें विभिन्न राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता सहित बड़ी संख्या में स्थानीय महिला-पुरूष शामिल रहे। इस दौरान कंपनी मालिक और बिचौलियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। फैक्ट्री प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए गए। 

फैक्ट्री के मेन गेट पर धरना देते लोग

वहीं लोगों को समझाने पहुंचे पतरातू अंचलाधिकारी मनोज कुमार चौरसिया को आक्रोशित लोगों ने घटनाक्रम के बावत जानकारी देते हुए रामगढ़ उपायुक्त को बुलाने की बात कहते हुए बैरंग लौटा दिया। इस बीच एंबुलेंस पर मृतकों के शव फैक्ट्री पहुंचने पर फैक्ट्री कर्मी भावुक हो गए । जिससे स्थानीय लोग और भी आक्रोशित हो उठे। मामला के तूल पकड़ने की संभावना को देखते हुए बड़ी संख्या में पुलिस बल की तैनाती कर दी गई। जबकि आक्रोशित लोग प्रबंधन पर कानूनी कार्रवाई और मृतकों के समूचित रुपए मुआवजा देने की मांग करते रहे। वहीं शाम में मामले की जानकारी पर पहुंचे बड़कागांव विधायक रोशन लाल चौधरी के हस्तक्षेप पर पुलिस प्रशासन की मौजूदगी में मृतकों के परिजन और प्रबंधन के बीच मुआवजे को लेकर कई बार वार्ता हुई। लेकिन सहमति नहीं बनी। खबर लिखे जाने तक मामला नहीं सुलझ सका और सड़क जाम की स्थिति बनी रही।

विलाप करते परिजन

जानिए कैसे हुआ हादसा, क्यों गई जान 

फैक्ट्री के कंट्रोल रूम में टरबाइन के ब्लास्ट होने और आग लगने से यह भीषण हादसा हुआ है। बताया जाता है इलेक्ट्रिक जेनरेटर को ठंडा रखने के लिए लगाया गया एसी तकरीबन डेढ़ माह से ख़राब था। ओवर हीट की वजह से जेनरेटर के पैनल ने काम करना बंद कर दिया। जिससे टर्बाइन बंद नहीं हो सका और ओवर स्पीड के कारण स्टीम के भारी दबाव के साथ ब्लास्ट कर गया। इस क्रम में टरबाइन के पीछे टैंक के ईंधन में आग लग गई। आग ने पूरी कंट्रोल रूम को चपेट में लिया। ब्लास्ट से कंट्रोल रूम के उपरी छोर पर घोंसला बनाकर रह रहे कई पंक्षी भी बेमौत मारे गए है। 

साथियों की मौत फैक्ट्री के कर्मियों का भी धैर्य टूटा

धरना-प्रदर्शन के बीच अस्पताल से वापस फैक्ट्री पहुंचे शवों को देख मृतकों के सहकर्मियों का धैर्य आखिर जवाब दे गया। उनकी आवाज में पीड़ा और विवशता साफ महसूस हुई। उन्होंने घटनाक्रम की जानकारी देते हुए कहा कि पिछले डेढ़ महीने से हादसे की संभावना जताते हुए वरीय अधिकारियों को फोटो-वीडियो भेजकर इलेक्ट्रिक जेनरेटर के हीट बढ़ने की जानकारी देते हुए एसी ठीक कराने की मांग की जा रही थी। बावजूद इसके सुधार नहीं किया जाता है और लापरवाही बरती जाती रही। दबाव बनाकर खतरनाक परिस्थितियों में काम कराया जाता है। कहा कि प्रबंधन की तानाशाही के कारण उनके तीन साथियों की जा गई है। वे अंतिम क्षणों तक टरबाइन बंद करने की मशक्कत करते रहे, क्योंकि प्लांट को शट डाउन करने में काफी समय लग जाता और हादसा और भयावह हो सकता था। 

सड़क पर उतरे लोग, हादसे पर दिखा आक्रोश 

फैक्ट्री गेट पर धरना देते लोगों ने कानूनी कार्रवाई और मुआवजे को वार्ता की सुगबुगाहट नहीं होती देख दोपहर बाद रामगढ़-पतरातू फोरलेन सड़क पर उतर गए। सड़क को जाम कर दिया। इस दौरान दोनों तरफ वाहनों की कतार लग गई। आवागमन ठप होने से आम लोगों को काफी परेशानी उठानी पड़ी। जाम में फंसे लोग सरकारी तंत्र को कोसते और सिस्टम पर सवाल उठाते दिखे। वहीं सड़क जाम करते ग्रामीणों ने कहा कि फैक्ट्री प्रबंधन की तानाशाही और मनमानी आज की नहीं है। फैक्ट्री प्रबंधन आम लोगों को कीड़े-मकोड़े ही समझती रही है। इनकी कारगुजारियों पर कई बार लोग आंदोलन को विवश हुए हैं‌। इनके खिलाफ शिकायतें न नेता सुनते हैं न अधिकारी। कहा कि मरने वाले लोग इसी राज्य के है और हादसे की पूरी तरह जिम्मेदार फैक्ट्री प्रबंधन है। 

बेतहाशा प्रदूषण फैलाने के लिए बदनाम रामगढ़ जिले की फैक्ट्रियां अब हादसों के लिए सुर्खियां बटोर रही है। आए दिन हादसे हो रहे हैं और कर्मी जान गवां रहे हैं। लोग बताते हैं कि हादसे होने पर शायद “अटैची” निकलती है तभी अनहोनी की मुहर लग जाती है। सिस्टम में बैठे लोग प्राकृतिक आपदा घोषित नहीं करते यही उनका बड़प्पन है। इसके अलावा चुनावी चंदा भी हर फंदे से बचा लेता है। किसी प्रकार की कार्रवाई  पूंजीपतियों की चौखट चाटने के अवसरों से वंचित भी कर सकती है। 

 

By Admin

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