रिपोर्ट – एस. अंसारी

रांची: 11वीं से 13वीं जेपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के जरिए नौकरी पाने वाले अभ्यर्थियों का मामला अब झारखंड हाई कोर्ट पहुंच गया है। सरकार द्वारा 342 अभ्यर्थियों की नियुक्ति रद्द करने की अधिसूचना के खिलाफ सोनम कुमारी और अन्य ने याचिका दायर कर अपनी नियुक्ति बहाल करने की मांग की है।

याचिका में बताया गया है कि चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद 24 नवंबर 2025 को नियुक्ति पत्र मिला और प्रशिक्षण भी पूरा किया गया। इसके बाद दूसरी नौकरी छोड़कर झारखंड में सेवा देने का निर्णय लिया गया। लेकिन 18 अगस्त 2026 को सरकार ने अचानक अधिसूचना जारी कर नियुक्ति समाप्त कर दी।

अभ्यर्थियों के अनुसार यदि परीक्षा में कोई गड़बड़ी हुई है तो उसकी जांच हो और दोषियों पर कार्रवाई की जाए, लेकिन इसका नुकसान उन अभ्यर्थियों पर नहीं थोपा जाना चाहिए, जिन्होंने मेहनत से परीक्षा पास की है।

गौरतलब है कि सीआईडी की जांच रिपोर्ट के बाद सरकार ने टीडीपीएल से जुड़ी परीक्षाओं को रद्द कर दिया है। साथ ही 2014 के बाद हुई प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितता की आशंका को लेकर जांच के आदेश भी दिए गए हैं। इस कड़ी में सरकार ने 22 परीक्षाएं रद्द की हैं, 6 परीक्षाओं की प्रक्रिया रोक दी है और 17 पुरानी परीक्षाओं को जांच में शामिल किया है।

अब हाई कोर्ट में इस मामले की सुनवाई के बाद ही स्पष्ट होगा कि सरकार का फैसला कानून की कसौटी पर कितना खरा उतरता है। इस याचिका से सिर्फ एक अभ्यर्थी नहीं बल्कि 11वीं से 13वीं जेपीएससी से चुने गए सभी 342 अभ्यर्थियों का भविष्य जुड़ा है। इसलिए कोर्ट के फैसले पर राज्य के अभ्यर्थियों की नजरें बनी हुई हैं।

 

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