रांची: झारखंड ने कोयले को GST से बाहर कर उस पर VAT लगाने की अनुमति देने की मांग केंद्र के सामने रखी है। बुधवार, 8 अक्टूबर को हुई GST काउंसिल की बैठक में वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि मौजूदा व्यवस्था से कोयला उत्पादक राज्य को अपेक्षित राजस्व नहीं मिल रहा है। उन्होंने केंद्र से 1.36 लाख करोड़ रुपये के पुराने बकाये का भुगतान करने की मांग भी उठाई।

वित्त मंत्री ने बताया कि GST लागू होने से पहले कोयला 5 प्रतिशत VAT के दायरे में था। इससे झारखंड को राजस्व मिलता था। GST व्यवस्था में खपत वाले राज्यों को कर का लाभ मिलने से झारखंड से निकले कोयले पर राजस्व का बड़ा हिस्सा दूसरे राज्यों को मिलता है।

राज्य सरकार का तर्क है कि कोयला खनन का पर्यावरणीय और सामाजिक असर झारखंड को झेलना पड़ता है। ऐसे में उत्पादक राज्य को भी राजस्व का उचित हिस्सा मिलना चाहिए। सरकार के मुताबिक, कोयले पर 18 प्रतिशत GST की जगह 5 प्रतिशत VAT लागू होने से बिजली उत्पादन की लागत घट सकती है।

कई फैसलों से आर्थिक दबाव का दावा

बैठक में राज्य सरकार ने केंद्र के विभिन्न फैसलों से झारखंड पर बढ़े आर्थिक बोझ का मुद्दा भी उठाया। सरकार के अनुसार, GST दरों में बदलाव से करीब 4,000 करोड़ रुपये, GST क्षतिपूर्ति बंद होने से करीब 2,500 करोड़ रुपये और VB-G-RAM-G व्यवस्था से करीब 4,000 करोड़ रुपये का सालाना असर पड़ रहा है।

मनरेगा में केंद्र की हिस्सेदारी 90 प्रतिशत थी, जबकि नई व्यवस्था में यह 40 प्रतिशत बताई गई है। इसके अलावा MMDR Act में बदलाव से करीब 1,400 करोड़ रुपये सालाना नुकसान का दावा किया गया।

वित्त मंत्री ने इन वित्तीय दबावों के साथ पुराने 1.36 लाख करोड़ रुपये के बकाये का भुगतान जल्द करने की मांग भी केंद्र के समक्ष रखी।