मैदान में दमखम, रेस ट्रैक पर दिखा जोश! |
रामगढ़: टाटा डीएवी पब्लिक स्कूल घाटो सोमवार को खिलाड़ियों के उत्साह और उनके जोश से लबरेज रहा। स्कूल के परिसर में क्लस्टर स्तरीय एथलेटिक्स प्रतियोगिता का भव्य शुभारंभ हवन के साथ हुआ। अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि क्लस्टर प्रमुख झारखंड (जोन डी) डॉ. एस. के. शर्मा, ने झंडोत्तोलन कर प्रतियोगिता की शुरुआत की। इससे पूर्व विद्यालय की प्राचार्या डॉ. सोनिया तिवारी ने सभी अतिथियों को पौधा भेंट कर स्वागत किया। साथ ही साथ विद्यार्थियों द्वारा तैयार थीम आधारित चित्रांकन, कपड़े के झोले, बैज और सैश भी अतिथियों को दिए गए।

कार्यक्रम में बतौर विशिष्ट अतिथि टाटा स्टील वेस्ट बोकारो डिवीजन के वरीय प्रबंधक खेल विभाग राजीव रंजन, बिरसा मुंडा डीएवी पब्लिक स्कूल के प्राचार्य तारकेश्वर कुमार, डीएवी पब्लिक स्कूल तोपा के प्राचार्य राकेश कुमार सिन्हा, डीएवी पब्लिक स्कूल उरीमारी के प्राचार्य प्रशांत कुमार भूयान, डीएवी पब्लिक स्कूल सिल्ली के प्राचार्य बुबुन शरण, डीएवी पब्लिक स्कूल सिमडेगा के प्राचार्य सुजॉय कुमार मिश्रा, सांसद प्रतिनिधि डॉ. अरविंद कुमार, उप मुखिया सोनडीहा पंचायत सीमा परवीन शामिल रहे।
खेल से बनता है व्यक्तित्व : डॉ. सोनिया तिवारी
अपने स्वागत संबोधन में डॉ. सोनिया तिवारी ने कहा कि डीएवी की पहचान ही यह है कि यहां शिक्षा के साथ-साथ खेल को भी व्यक्तित्व निर्माण का सशक्त माध्यम माना जाता है। खेल अनुशासन, आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता, टीम भावना और संघर्षशीलता सिखाते हैं। उन्होंने सभी प्रतिभागियों से निष्पक्ष खेल भावना के साथ उत्कृष्ट प्रदर्शन का आह्वान किया।
प्रतिभाओं को मिलता है मंच : डॉ. एस. के. शर्मा
उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि डॉ. एस. के. शर्मा ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि स्कूल स्तर की प्रतियोगिताएं ही छिपी प्रतिभाओं को पहचान कर उन्हें दिशा देने का सबसे बड़ा मंच हैं। उन्होंने नियमित अभ्यास, अनुशासन और दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ने की सलाह दी और आयोजन की सराहना की।
प्रतियोगिता में दौड़, रिले, हाई जंप, लॉन्ग जंप, ट्रिपल जंप, शॉट पुट, डिस्कस थ्रो, जैवलिन थ्रो सहित अन्य प्रतिस्पर्धाएं हुईं। जिसमें छात्र-छात्राओं ने पूरे उत्साह के साथ भाग लिया और उम्दा प्रदर्शन करते हुए उन्होंने दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं कार्यक्रम को सफल बनाने में विद्यालय के खेल शिक्षकों सहित सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं का अहम योगदान रहा।
