हजारीबाग: सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहे अलग-अलग नैरेटिव के बीच युवाओं को तथ्य और भ्रम में फर्क समझने की जरूरत है। महिलाओं के सम्मान, अधिकार और सामाजिक भूमिका को लेकर भी जागरूकता जरूरी है। यह बात सोमवार को विनोबा भावे विश्वविद्यालय के विवेकानंद सभागार में आयोजित ‘मातृवंदन नारी शक्ति’ कार्यक्रम में सामने आई।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के कार्यक्रम में मुख्य अतिथि आईआरएस अधिकारी निशा उरांव ने छात्राओं और युवाओं से सोशल मीडिया सामग्री को बिना जांचे स्वीकार नहीं करने की अपील की। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर महिलाओं, संस्कृति और सामाजिक मुद्दों को लेकर कई तरह की धारणाएं बनाई जा रही हैं। ऐसे में जागरूकता और विवेक जरूरी है।
निशा उरांव ने महिला और पुरुष को समान अधिकार व सम्मान दिए जाने पर जोर दिया। उन्होंने सनातन परंपरा में मां सरस्वती, मां लक्ष्मी और मां दुर्गा के स्वरूपों का उल्लेख करते हुए महिलाओं के सम्मान से जुड़े सवालों पर संतुलित दृष्टिकोण रखने की बात कही।
जौहर प्रथा पर भी हुई चर्चा
कार्यक्रम में जौहर प्रथा को लेकर अभिनेत्री स्वरा भास्कर की टिप्पणी का भी संदर्भ आया। निशा उरांव ने कहा कि ऐतिहासिक घटनाओं को समझते समय उस दौर की परिस्थितियों और सामाजिक संदर्भ को भी ध्यान में रखना चाहिए।
एबीवीपी की केंद्रीय कार्यकारिणी सदस्य कुमारी दिशा गुप्ता ने कहा कि महिलाओं और छात्राओं को जागरूक एवं सशक्त बनाने के उद्देश्य से देशभर में शक्ति सम्मेलन किए जा रहे हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर चलने वाले महिला-पुरुष संबंधी ट्रेंड और कंटेंट पर स्वस्थ चर्चा की जरूरत बताई।
जिला संयोजक साहिल कुमार ने कहा कि महिलाओं और माताओं के सम्मान में यह आयोजन किया गया। उन्होंने कहा कि समाज के विकास में महिलाओं की भूमिका महत्वपूर्ण है और युवाओं को भ्रामक व उकसाने वाली ऑनलाइन सामग्री से सावधान रहना चाहिए।
कार्यक्रम में एबीवीपी पदाधिकारी, कार्यकर्ता, छात्राएं और बड़ी संख्या में महिलाएं मौजूद रहीं।
