मांडू (रामगढ़): कृषि विज्ञान केंद्र मांडू ने खरीफ मौसम में किसानों से स्वर्ण उन्नत धान की रोपाई वैज्ञानिक तकनीकों से करने की अपील की है। केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. सुधांशु शेखर ने कहा कि रामगढ़ जिला वर्षा आधारित क्षेत्र है और अनुशंसित तकनीक अपनाने से धान की उपज में 15 से 20 प्रतिशत तक वृद्धि के साथ उत्पादन लागत भी कम की जा सकती है।

केंद्र द्वारा आयोजित अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन में स्वर्ण उन्नत धान की औसत उपज 50 से 55 क्विंटल प्रति हेक्टेयर दर्ज की गई जबकि किसानों की परंपरागत विधि से उपज 40 से 45 क्विंटल प्रति हेक्टेयर ही रही। इससे किसानों को बेहतर उत्पादन के साथ अधिक शुद्ध लाभ मिला।

वैज्ञानिकों ने बताया कि रोपाई के लिए 20 से 25 दिन की स्वस्थ और रोगमुक्त पौध का चयन करें। प्रत्येक जगह दो से तीन पौधे लगाएं और 20 गुणा 15 सेंटीमीटर की दूरी रखें। इससे अधिक कल्ले निकलते हैं और पोषक तत्वों का बेहतर उपयोग होता है। रोपाई के बाद खेत में दो से तीन सेंटीमीटर पानी रखें और अधिक गहरा पानी भरने से बचें। संतुलित जल प्रबंधन से 20 से 30 प्रतिशत तक सिंचाई के पानी की बचत संभव है।

उर्वरकों का प्रयोग मृदा परीक्षण या मृदा स्वास्थ्य कार्ड के अनुसार करें। नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश के साथ जरूरत के अनुसार जिंक और अन्य सूक्ष्म तत्व भी दें। जैविक खाद और हरी खाद के उपयोग से मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है। रोपाई के शुरुआती 20 से 40 दिन खरपतवार नियंत्रण के लिए महत्वपूर्ण हैं। इसके लिए रोपाई के शून्य से तीन दिन के भीतर प्रेटिलाक्लोर का प्रयोग किया जा सकता है। यदि खरपतवार निकल आएं तो 15 से 25 दिन बाद Bispyribac सोडियम का छिड़काव करें। फसल का नियमित निरीक्षण कर तना छेदक, पत्ती लपेटक और भूरे फुदके जैसे कीटों की समय पर पहचान कर समेकित कीट प्रबंधन अपनाने की सलाह दी गई।

डॉ. शेखर ने कहा कि वैज्ञानिक खेती से संसाधनों का कुशल उपयोग होगा और किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। कृषि विज्ञान केंद्र ने सभी किसानों से तकनीकी जानकारी और प्रशिक्षण के लिए केंद्र से संपर्क करने का आग्रह किया है।

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