नागपुर/रांची: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के स्थापना के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर विजयादशमी कार्यक्रम में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने सामाजिक समरसता, स्वदेशी, पर्यावरण संरक्षण और युवा पीढ़ी के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर अपने विचार रखे। उन्होंने समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए सामूहिक प्रयासों की जरूरत बताई।
कार्यक्रम की शुरुआत पथ संचलन से हुई। इस दौरान मोहन भागवत ने शस्त्र पूजन किया और संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार को श्रद्धांजलि अर्पित की। RSS की स्थापना वर्ष 1925 में नागपुर में विजयादशमी के दिन हुई थी।
अपने संबोधन में भागवत ने सामाजिक समरसता, परिवारों में संस्कार, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी और नागरिक अनुशासन को समाज के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए ‘पंच परिवर्तन’ की अवधारणा पर जोर दिया।
भागवत ने डिजिटल माध्यमों और ओटीटी प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध सामग्री को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी पर डिजिटल सामग्री का प्रभाव पड़ता है, इसलिए इसके प्रति जागरूकता जरूरी है। उन्होंने पर्यावरण संतुलन, हिमालय के संरक्षण, सोशल मीडिया के जिम्मेदार इस्तेमाल और नशे की समस्या जैसे विषयों पर भी ध्यान देने की बात कही।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर भागवत के संबोधन की सराहना की।
| प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने RSS के 100 वर्ष पूरे होने पर संघ प्रमुख मोहन भागवत के संबोधन की सराहना करते हुए सामाजिक समरसता, आत्मनिर्भरता और राष्ट्र निर्माण के संदेश को रेखांकित किया। |

